Friday, January 28, 2011

मुझे माफ कर दो....


.....कुछ लोग जिंदगी में भुलाये नहीं जा सकते .कुछ तो बिलकुल भी नहीं भुलाये जा 

सकते.क्यूंकि जिंदगी का वजूद उन्ही से होता है.सबकी जिन्दगी में कोई न कोई शख्स ऐसा तो 

जरूर होगा जिसके होने का एहसास धरती से निकलती हर आहट कराती होगी...............फूलों 

की खुशबू ..................बहती हवाएं कराती होंगी.सितारों की छावं और सूरज की रौशनी कराती 

होगी......मेरी जिन्दगी में भी एक ऐसी शख्सियत थी......बात उन दिनों की है जब मै 

मुश्किलात के दौर से गुजर रहा था...हालात मेरे खिलाफ थे.ऐसे में मुझे जिसका साथ मिला वो 

थी मांडवी...उस वक्त अगर मांडवी साथ ना होती तो शायद ये जिंदगी कब की बिखर गयी होती 

लेकिन अब वो मुझसे मेरी गलतिओं के कारण दूर हो गयी है-बहुत दूर हो गयी है..आज मुझे 

मेरे गलतिओं का एहसास हुआ है..मैं उससे माफ़ी मागना चाहता हूँ....दोस्तों दुआ करिये की वो 

मुझे माफ करे...

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प्रिय मांडवी,

      आज तुम्हारा जन्मदिन है..तुम्हे जनम दिन की बहुत बहुत मुबारकबाद 

तुम्हारी जिंदगी हमेशा खुशहाल रहे.रब से यही दुआ है....खुशियाँ तुम्हारे दामन में सजती रहें...

...मांडवी तुम्हे याद हैं कालेज के वो मस्ती भरे दिन..वो बीते हुए पल जो हमने साथ-साथ 

गुजारे थे...क्लास बंक कर के ...मूवी का मोर्निंग शो.. कैंटीन....और कैंटीन में तुम्हारा समोसे 

खाने का अंदाज आज भी जब मै समोसे खाता हूँ.तो तुम्हारा चेहरा याद आ जाता है.मांडवी तेरी 

आँखे मटकाने वाली सीन जब भी मुझे याद आती है मै अपनी हंसी रोक नही पाता हूँ..

कितना अच्छा था वो पल. काश वक्त वहीं थम गया होता...लेकिन बेरहम वक्त कहा थमता है ये 

तो हर पल हर घडी...आगे बढ़ता रहता है..बदलता रहता है..अक्सर बड़े लोगों से सुना करता था 

की वक्त का पहिया चलता रहता है इसलिए इसका बेहतर से बेहतर इस्तेमाल कर लो....बीता 

हुआ समय वापस नही आता......तब ये बात समझ में नही आती थी. पर आज आ गयी है. 

गोविन्द सर ठीक ही कहा करते थे...बेटा जब जिंदगी सिखलाएगी तब बात समझ में 

आयेगी.आज मेरी जिंदगी ने मुझे सिखला दिया है...मांडवी तुमने तो मेरी जिंदगी बदल दी.मुझे 

एक नेक और कामयाब इंसान बनाया.लेकिन मैंने तुम्हारे लिए क्या किया शायद कुछ भी 

नहीं...जब तुम मेरे पास थी तब मै तुम्हे समझ नही सका और आज जब तुम्हारी अहमियत 

समझ आई है तब तुम पास नही हो...


मैंने कभी भी तुम्हे समझने कोशिश नहीं की.तुम्हारे जज्बातों को अहमियत नही दिया...तुम तो 

हमेशा मेरे मुस्कान बनी रही लेकिन मैंने तुम्हे कभी हँसाने की कोशिश नही की.मांडवी मेरे 

जिंदगी की सबसे बड़ी गलती वो थी जब मैंने तुम पर शक किया था.और तुमसे लड़ाई की 

थी.तुम्हारी किसी बात को सुने बैगेर तुम्हे बुरा-भला कहा...पता नही किसकी नजर लगी थी 

हमको..मांडवी आज मेरी जिंदगी में वो सब कुछ है जिसकी हमने चाहत की थी...फिर भी कुछ 

कमी सी लगती है..ये कमी तुम्हारी है.सिर्फ तुम्हारी....मांडवी कई दिनों से तुमसे दिल की बात 

कहना चाह रहा था पर हिम्मत नही हुई.आज बहुत हिम्मत करके तुम्हे ये मेल कर रहा 

हूँ...

मुझे मेरी गल्तिओं के लिए माफ कर दो.प्लीज़ ..शायद मै माफ़ी मांगने काबिल भी नहीं हूँ. 

लेकिन हो सके तो मुझे माफ करना.....
                                             

                                            सिर्फ तुम्हारा 
                                               
                                               आशीष 
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...दोस्तों जिंदगी में कुछ शख्स ऐसे होते हैं जो हमारी केयर करते हैं.हमारी दुनिया को सवारते 

हैं.लेकिन हम उनकी परवाह नही करते है और जाने अनजाने उनका दिल दुखाते हैं...दूसरों की 

बातों को अहमियत देते हैं लेकिन उसकी बात नही मानते,जो हमारा अपना है..संबंधों में शक को 

महत्व देते हैं ..और ये शक ले डूबता है रिश्तों को ....क्या आप ने भी किसी अपने का दिल 

दुखाया है...जरा गौर करिये अपने आस-पास.....ऐसा कौन सा शख्स है जिसे आपने तकलीफ 

पहुंचाई  है?...कोई...दोस्त?...मम्मी?...पापा?...भाई?...बहन?...टीचर?.......तकलीफ पहुंचाई है न !
.....तो दोस्त देर न करिये! कर डालिए अपने गलती का पछतावा.मांग लीजिए माफ़ी......चलो 

एक काम करते हैं जो हमसे रूठे है उनको मानते हैं........

क्योंकि.....

                
               ''किस्मत वालों को ही पनाह मिलती है किसी के दिल में.

                 यूँ ही हर शख्स को जन्नत का पता नही मिलता'' ......

Thursday, January 27, 2011

चश्मा दिल की नजर का....


गुलाबी ठण्ड..... गुनगुनाती धूप....कुल मिलाकर मौसम मस्ताना..आज तो बस मौज काटने का मन हो रहा था...लेकिन मन का हमेशा थोड़े ही होता है ‘‘होता वही है जो मंजूरे खुदा होता है.’’.. यूनिवर्सिटी में...मुकुल सर कि क्लास होनी थी तो बस जाना ही था...यूनिवर्सिटी के लिए टम्पू में बैठा....बड़ा शौक़ीन टाइप का  ड्राइवर था....झमाझम गाना बजे जा रहा था एक के बाद एक...........गोरे गोरे मुखड़े पे कला कला चश्मा .....तौबा खुदा खैर करे खूब है करिश्मा....खूब है करिश्मा...खैर १५ मिनट की दूरी तै कर मै यूनिवर्सिटी कैम्पस पंहुचा..
....मै यूँ ही गुनगुनाये जा रहा था गोरे-गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा....मेरा टिंकू जिया आज अटक गया इस गाना पे.....मै बार-बार गुनगुनाये जा रहा था ...गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा...गोरे-गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा...जब टिकू जिया अटक ही गया है तो क्यों न आज इसी कि सुने और बात करें ‘गोरे मुखड़े’ और ‘काले चश्मे’ की.
...यारों जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जिसे ‘गोरे मुखड़े’ न पसंद हो हर दिल कि चाहत होती है कि वह खूबसूरत दिखे...इसी चाहत ने सौंदर्य प्रसाधनों का एक बड़ा बाज़ार तैयार कर दिया है.तमाम तरह के प्रोडक्ट्स बाज़ार में मौजूद है जो लोगों कि इस चाहत को कैश कराती है....और लोग गोरा बनाने के चक्कर में पिले पड़े हैं....फेयर एंड हैण्डसम कि खफत जबर्दस्त हो चली है.....पहले ये माना जाता था श्रंगार महिलाओं का काम होता है...
लेकिन अब लड़के भी पीछे नही हैं......और अगर इस सुन्दर मुखड़े पर एक चश्मा लगा हो तो कहना ही क्या.....
.....चश्मे से याद आया अभी हाल ही में एक मूवी आई थी दबंग...उसमे चुलबुल पांडे(सलमान खान) का चश्मा लगाने का अंदाज  सबसे जुदा था वैसे तो चश्मा नाक के ऊपर होता है लेकिन चुलबुल मियां ने अपने गर्दन पर लगा रक्खी है जब उससे एक सीन में जब दयाल बाबू (अनुपम खेर) चुलबुल पांडे से पूछता है
तुम ये काला चश्मा पीछे क्यों लागते हो? तो वो कहता है....
ताकि हमें आगे और पीछे दोनों तरफ दिखे......
....क्या ऐसा पासिबल है???शायद नही!.
चश्में का इस्तेमाल हम चीज़ों को साफ़ देखने में करते हैं....लेकिन जब बात शौक की आती है तो हमे अक्सर देखने को मिल जाता है लोग रात में भी काला चश्मा पहन कर बड़े गर्व से चलते हैं....इस बात से बेफिकर होकर कि कदम कभी भी लडखड़ा सकते हैं.....भई फैशन की दुनियां में गारंटी कहाँ होत्ती है.......
चलिय इसी टोपिक को लेकर डूबते हैं जीवन की गहराइयों में.नाक के ऊपर लगने वाले इस चश्मे के बारे में तो सभी जानते है लेकिन एक चश्मा हमारे दिल-ओ –दिमाग पर भी लगा होता है...नाक पर लगे चश्मे से तो हम सिर्फ बाहरी चीजों को देखते हैं पर मजे की बात ये की दिल-ओ–दिमाग पर लगे चश्मे से हमारा नजरिया बनता है..और नजरिया ही हमारा व्यव्हार निर्धारित करता है....जिस तरह से नाक पर लगने वाले चश्मे में कई कलर के ग्लास होते है..ठीक इसी तरह दिल-ओ–दिमाग पर लगने वाले चश्मे में भी कई तरह के ग्लास लगे होते हैं......
मन चंगा तो कठौती में गंगा”....तो भईया मन को चंगा रखिये और मस्त रहिये.....और दुनिया को दिल की नजर से देखना शुरू कीजये....फिरे देखिये ये दुनियां कितनी हंसी है..........  

Tuesday, January 25, 2011

मेरा टिंकू जिया ...


आज जब युनिवर्सिटी से निकला तो मन में एक बात उमड़-घुमड़ रही थी की यार आज कुछ लिखना है.पर सबसे बड़ा ये प्रश्न यह था कि लिखूं क्या??अब कोई बहाना चलने वाला था नहीं अब तो बस लिखना ही है.वैसे तो दिमाग में हजारों ख्याल
उमड़ते- घुमड़ते रहेंगे लेकिन जब आज जरूरत है तो हर तरफ सन्नाटा...मेरा टिंकू जिया बहुत बेचैन है........
एकदम से मेरे दिमाग में आया क्यों न बात फिल्मों की की जाये.क्योंकि टिंकू हमारा सिनेमा का दीवाना भी है...और गाने का भी शौक़ीन है.वो भी धीमे-धीमे नहीं जोर-जोर से....
फिल्मे मनोरंजन का सबसे अच्छा तरीका होती हैं.तीन घंटे की सिनेमाई दुनिया में इंसान अपने सारे  दर्दोंगम भूल डूब जाता है कल्पना के सागर में... लेकिन वर्गभेद यहाँ पर भी देखने को मिलता है.  सिनेमा देखने वाला भी दो वर्गों में बंटा हुआ है अमीर-गरीब/उंच-नीच अमीरों की बात ही कुछ और है उनके पास पैसा है...और पैसा है तो जाहिर सी बात है. प्रोब्लम काफी हद तक कम होती हैं .लेकिन बेचारा टिंकू तो आम आदमी हैं...जिसको हर चीज़ मैनेज करना होता है कुछ भी करने से पहले अपना
बजट भी देखना होता है...
महंगाई के इस दौर में जहाँ आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती रोटी,कपडा,मकान,शिक्षा,बनी हुई है अब ऐसे में टिंकू जिया सनेमा का दीवाना हो गया है तब तो बड़ी ‘मुश्किल बाबा बड़ी मुश्किल’...मुश्किल इसलिए कह रहा हूँ कि भाई!अब है मल्टीप्लेक्स का जमाना.छोटे मोटे सिनेमाघर या तो बंद हो चुके हैं या बंद होने के कगार पर है.अब ऐसे में टिंकू को बेचारा होना ही पढ़ेगा...मल्टीप्लेक्स के इस दौर में १ शो देखने के लिए टिंकू के पास.नास्ता-वास्ता छोडकर कम से कम १५० रूपये होना ही चाहिए.टिंकू वह आम आदमी है जो रोज
१० -१२ घंटे काम करने के बाद बमुश्किल से १५० से २०० तक कमा पाता है...अब ऐसे में वो सिनेमा देखने की सोंचे तो???...टिंकू जो जोर-जोर से गाने का शौक़ीन है उसकी घिग्घी बांध जाती है..... वो मजबूर है या तो वो दिनभर की कमाई में सिनेमा  देखे या फिर अपना खाना पीना करे ..और फेमिली  को दे....
यह एक गंभीर मसला है हर उस टिंकू के लिए जो आम इंसान है.जिसके ऊपर जिम्मेदारी है खुद की और परिवार की.मनोरंजन के नाम पर बड़े-बड़े बिजनेसमैन सरकार से सस्ती दरों पर जमीन लेते हैं...मल्टीप्लेक्स बनवाते हैं...उद्देश्य तो इनका मनोरंजन ही होता है लेकिन टिकट के दाम इतने ज्यादा होने का कारण ये आम आदम के बजट के बाहर होता है.हालाँकि अब मल्टीप्लेक्स वाले अपनी औंकात पर आ रहे हैं.और मार्निंग शो का चलन भी शुरू हो गया है.जहाँ हफ्ते में कुछ दिन सस्ती दरों पर फिल्म दिखाया जाता है....मसलन ५०  से ६० रूपये..लेकिन समस्या का ये पूरा समाधान नहीं है..आम आदमी को बाजार से निकल कर बाजार बनाने वालों को समझ आनी चाहिए की उनका सिनेमा जब मल्टीप्लेक्स से बेआबरू होकर निकलता है तो आम आदमी की कड़ी कमाई के बल पर सराहा जाता है.सरकार को चाहिए की कम लागत वाले सनेमा घरों को प्रोत्शाहित करे ताकि हर टिंकू सनेमा देख सके...और जोर-जोर से गा सके.....   

Saturday, January 22, 2011

हेल्लो  दोस्त !....आज बात करते हैं जिंदगी की दोस्तों कभी आप ने गौर किया है कि मौसम की तरह जिंदगी के भी कई रंग होते हैं .इसमें सुख दुःख का आना जाना लगा रहता है जिंदगी का सफ़र आसान नहीं होता इसमें मुश्किलें भी आती है नाकामियां भी मिलती हैं ...होता है न ऐसा ??? जरूर होता होगा . लेकिन ऐसे में हमे परेशां नही होना चाहिए,हमारी सारी नाकामियां और राह में आने वाली सारी मुश्किलें हमे जिंदादिल बने रहने कि सीख देती हैं. जरा सोचिये! अगर पहले पतझर का वीराना नहीं होता तो क्या बसंत इतना सुहाना लगता ?इसलिए जीवन में जब कठिनाई का दौर आये  तो हमे इसी सोच के साथ उसका सामना करना चाहिए कि जल्द ही हमारी खुशियों का दौर वापस आने वाला है ..........अगर ऐसा करना सीख लिया है तो बस हो जएगी  जिंदगी फ़िल्मी और जिंदगी का सफ़र सुहाना .....छोटी छोटी आशाओं का दामन थाम कर चलने से जिंदगी का मुश्किल सफ़र भी बहुत आसान हो जाता है.सचमुच उमीदों पर दुनिया कायम है.जरा सोचिये अगर हमारे मन में जीने कि तमन्ना और खुशियाँ हासिल करने लालसा न हो तो जिन्दगी कितनी बोझिल हो जाएगी......इसलिए दोस्त आशाओं का दामन थाम बढ़ते रहिये जिंदगी कि राह में .......और मजे लीजिये जीवन के खेल का!!!!!

   

Friday, January 21, 2011

मुझसे ही अनजान हो गया .....


                       अपनेको  हँसता देख मै हैरान हो गया
                       तुझसे ही जिंदगी मै परेशां हो गया!
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                       हैं कैसे कैसे लोग यहाँ आ कर बस गए
                       बसता हुआ जो घर था, वो वीरान हो गया!
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                       किसका करें भरोसा ज़माने में हम आज
                       दिखता जो आदमी था शैतान हो गया!
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                       इल्जाम भी लगाने से वो बाज नहीं आता
                       जो था अक्ल वाला नादाँ हो गया!
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                       या रब दुआ कीजिये उसपे करम सदा
                       जो दोस्त मेरा मुझसे ही अनजान हो गय!