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Sunday, April 3, 2011



हो अंतर्मन में तुम्ही प्रिये
तुम्हे भूलें भी तो कैसे?
हो जीवन ज्योति तुम्ही प्रिये
ये ज्योति भुझाऊ कैसे?
जीवन ये सुमन तुमसे ही है
तुमसे है सारी ऋतुएं.
तुम बिन जीवन मलमास है
ऋतुराग सुहाए कैसे.
कहना है तुम्हारा, जाओ भूल मुझे
हो जाओ अपने प्रेम विरुद्ध
पर अफ़सोस
मुझे माफ करना
जिद्दी है अपना प्रेम प्रिये
इसे समझाऊ भी तो कैसे
हो अंतर्मन में तुम्ही प्रिये
तुम्हे भूलूं भी तो कैसे..
दुनिया निष्ठुर दिल निश्चल है..
दिल की मानू या दुनिया की सुनूं .  
तुम संग थी
अपनी हर बात प्रिये
ज़ज्बात भुलाऊ कैसे?
तुम्हे भूलूं भी तो कैसे
तुम्हे भूलूं भी तो कैसे
हो जीवन ज्योति तुम्ही प्रिये
ये जीवन ज्योति बुझाऊ कैसे.
   

Monday, March 7, 2011

ये सपनों को पंख लगते हैं.














ये सपनों को पंख लगते हैं.
जो भटके हम, राह दिखाते हैं.
चाहे हो पढाई का टेनसन
या फिर हो कोई प्रोब!
हर वक्त हमारी हेल्प के लिए,राजी रहते हो आप!
इतनी उलझन
फिर भी नो टेनसन,
हम सब का भार उठाते हैं.
हर प्रोब को दिखा के ठेंगा
बस ऐसे ये मुस्काते हैं..
ये अपने मुकुल सर हैंआशी
शिक्षा की ज्योति जलाते हैं....

Saturday, March 5, 2011

तुम



 
              
                
                  इक न इक दिन
                 तुम आओगी
                मुझे एतबार था
                 तुम मेरी होगी
             हर पल मेरे साथ होगी
                यह मेरा प्रेम था
                   आज
             तुम मेरे अनुभूति में हो
                    मेरी
             उदासी में इक मुस्कान हो
                   आज
              यह मेरा जीवन है..